
डिजिटल साक्षरता के सदुपयोग एवं दुष्प्रभाव विषय पर विस्तृत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।
ब्रह्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय राठ हमीरपुर की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई 1 एवं 2 द्वारा “डिजिटल साक्षरता के सदुपयोग एवं दुष्प्रभाव” विषय पर एक विस्तृत जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय परिसर में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आमजन को डिजिटल तकनीक के सकारात्मक उपयोग, साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के संतुलित प्रयोग तथा डिजिटल माध्यमों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ लक्ष्य गीत के साथ हुआ। तत्पश्चात NSS इकाई 1 के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जितेन्द्र सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज का युग डिजिटल युग है। शिक्षा, बैंकिंग, चिकित्सा, व्यापार और प्रशासन – हर क्षेत्र में डिजिटल माध्यमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि डिजिटल साक्षरता केवल मोबाइल या इंटरनेट चलाने का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह सही जानकारी की पहचान, साइबर अपराध से बचाव और डिजिटल नैतिकता को समझने की क्षमता भी है। उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधनों का उपयोग पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एवं कौशल विकास के लिए करने की प्रेरणा दी।
इसके पश्चात NSS इकाई 2 के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दुर्गेश कुमार ने अपने संबोधन में डिजिटल माध्यमों के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग समय की बर्बादी, मानसिक तनाव, एकाग्रता में कमी तथा सामाजिक दूरी का कारण बन सकता है। उन्होंने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ठगी और फेक न्यूज जैसी समस्याओं से सावधान रहने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को डिजिटल अनुशासन अपनाने और सीमित समय के लिए ही सोशल मीडिया का उपयोग करने का सुझाव दिया।
डॉ. एन.के. सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि डिजिटल साक्षरता समाज के समग्र विकास की कुंजी है। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल शिक्षा पहुंचाई जाए तो शिक्षा और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे स्वयं डिजिटल रूप से जागरूक बनें और दूसरों को भी जागरूक करें।
डॉ. एस.एन. कुशवाहा ने कहा कि इंटरनेट ज्ञान का विशाल भंडार है, परंतु सही और गलत जानकारी में अंतर करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करने और अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने डिजिटल गोपनीयता की सुरक्षा और मजबूत पासवर्ड के उपयोग के महत्व को भी समझाया।
डॉ. आर.बी. शर्मा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं, ई-पुस्तकें और वेबिनार विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक का सदुपयोग व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होता है।
श्री धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत देश तेजी से प्रगति कर रहा है। ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी है कि वे तकनीक का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें। उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें।
श्री द्रगपाल सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल माध्यमों के कारण दुनिया एक वैश्विक गाँव बन गई है। उन्होंने कहा कि हमें डिजिटल साधनों का उपयोग सकारात्मक सोच और रचनात्मक कार्यों के लिए करना चाहिए।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक अपने विचार प्रस्तुत किए। छात्र पुष्पेन्द्र ने कहा कि डिजिटल साक्षरता से पढ़ाई के नए अवसर प्राप्त होते हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान हुई है। सामिद ने कहा कि डिजिटल तकनीक के कारण जानकारी तक त्वरित पहुंच संभव हुई है, लेकिन हमें समय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
संदीप ने अपने वक्तव्य में कहा कि साइबर अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को साइबर सुरक्षा के मूलभूत नियमों की जानकारी होना आवश्यक है। प्रियाशी ने कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है, परंतु इसका उपयोग मर्यादित और जिम्मेदारीपूर्वक होना चाहिए।
वंदना ने कहा कि डिजिटल साक्षरता महिलाओं के सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसके माध्यम से महिलाएं घर बैठे शिक्षा और रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकती हैं। ममता ने कहा कि हमें डिजिटल उपकरणों का उपयोग सकारात्मक सोच और समाज सेवा के लिए करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने तथा उसके दुष्प्रभावों से बचाव के लिए सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन NSS इकाई के स्वयंसेवकों द्वारा किया गया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। महाविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।





